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‘रमन के गोठ’ आकाशवाणी से प्रसारित विशेष कार्यक्रम (दिनांक 11 दिसम्बर, 2016, समय प्रातः 10.45 से 11.05 बजे)

श्रोताओं नमस्कार!
(पुरूष उद्घोषक की ओर से)
 

  • आकाशवाणी के विशेष प्रसारण ‘रमन के गोठ’ में हम, सभी श्रोताओं का हार्दिक स्वागत करते हैं, अभिनंदन करते हैं। कार्यक्रम की सोलहवीं कड़़ी के लिए आकाशवाणी के स्टुडियो में माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी पधार चुके हैं।
  • डॉक्टर साहब नमस्कार, बहुत-बहुत स्वागत है आपका इस कार्यक्रम में।

मुख्यमंत्री जी

  • धन्यवाद। आपका भी और अपने रेडियो व टीवी सेट्स के सामने बैठकर मुझे सुन रहे श्रोताओं का भी।
  • जम्मो संगी-जहुंरिया, सियान-जवान, महतारी-बहिनी मन ला जय जोहार।

महिला उद्घोषक

  • मुख्यमंत्री जी, आपकी सरकार की तीसरी पारी के कार्यकाल का तीसरा वर्ष कल पूरा हो रहा है। इसके लिए आपको बहुत-बहुत बधाई। अपने दल में सबसे लम्बा कार्यकाल पूरा करने वाले आप अव्वल मुख्यमंत्री हो गए हैं। देश में सबसे लम्बे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले 10 राजनेताओं में भी आप शामिल हो गए हैं। आपका कार्यकाल अनेक उपलब्धियों से भरा हुआ है। इस अवसर पर विशेष रूप से आपको बहुत बधाई और शुभकामनाएं।

मुख्यमंत्री जी

  • मैं इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश की जनता को धन्यवाद देता हूं, क्योंकि मैंने जो कुछ भी किया है, उसके पीछे छत्तीसगढ़वासियों का प्यार, सहयोग, समर्थन, आशीर्वाद और मार्गदर्शन रहा है।
  • मेरा सौभाग्य है कि हमारे राष्ट्रीय नेतृत्व ने सदैव मुझ पर विश्वास किया और इस योग्य समझा कि मैं छत्तीसगढ़ की जनता की सेवा करूं। इसके लिए मैं अपने सभी नेताओं का, मार्गदर्शकों और पथ-प्रदर्शकों का भी शुक्रिया अदा करता हूं।
  • आज जब मैं तेरह साल पीछे पलटकर देखता हूं तो मुझे लगता है कि छत्तीसगढ़ ने जिन योजनाओं का क्रियान्वयन किया वो देश के लिए भी अनुकरणीय रहा। और यह सब इसलिए हुआ कि आपने मुझे आशीर्वाद दिया, और इस काबिल बनाया कि मैं बड़े निर्णय ले सकूं। और बड़े निर्णय लेने के साथ- साथ क्रियान्वयन की ताकत भी आपने मुझे दी। मैं उन योजनाओं को आज तेरह साल की यात्रा में चिन्हांकित करना चाहता हूं। जिसे मैंने अपने सबसे नजदीक माना है। जो ना केवल गरीबों के, महिलाओं के, स्कूल के बच्चों के बल्कि, आम आदमी के जीवन में जिसने परिवर्तन ला दिया। बस्तर से लेकर सरगुजा तक जिन योजनाओं ने न केवल लोगों के लिए एक राहत दी, बल्कि हिंदुस्तान में जिसे सबसे ज्यादा चर्चा मिली वो है।
  • मुख्यमंत्री खाद्यान सहायता योजना, खाद्य और पोषण बनाने में अव्वल 58 लाख  80 हजार परिवारों को खाद्यान सहायता, 1 रुपए किलो चावल, नमक की योजना और चना की योजना। यह एक अभूतपूर्व योजना है, जिसका हम सफलतापूर्वक क्रियान्वयन कर रहे हैं।
  • दूसरी योजना, जब मैं मुख्यमंत्री बना तो सबसे बड़ी चुनौती थी कि किसानों को ब्याज दर के ऋण से कैसे मुक्त किया जाए। कर्ज से किसान लदा हुआ था। और हमने सोचा कि एक ऐसी योजना बनाए, जिससे किसान कर्ज से मुक्त हो। और किसान को शून्य ब्याज दर पर ऋण देकर हमने 150 करोड़ से बढ़ाकर 3 हजार करोड़ तक हुई है। जो 14 प्रतिशत ब्याज दर पर मिलता था. वो शून्य ब्याज दर पर ऋण मिल रहा है। यह किसानों के लिए बड़ी राहत है।
  • तीसरी बड़ी योजना समर्थन मूल्य पर धान खरीदी। विगत 13 वर्षों में 5 करोड़ 60 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी 53 हजार करोड़ रूपए किसानों को भुगतान हुआ।
  • जब मैं दिल के करीब योजना की बात करता हूं, तो सबसे ज्यादा मुझे पसंद है और जिसका सबसे ज्यादा स्वागत हुआ। मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना, जिसमें हजारों बच्चों के हृदय के ऑपरेशन हुए। आज वो सुरक्षित जीवन जी रहे हैं। स्कूल जा रहे हैं, उनके चेहरों पर मुस्कान है। यही मुस्कान छत्तीसगढ़ के भविष्य की मुस्कान बनेगी। एक योजना जिसके बारे में जरूर जिक्र करूंगा। 108, 102 एम्बुलेंस व्यवस्था। लाखों परिवारों की सुरक्षा की है। जवानों को सड़क की दुर्घटना के दौरान होने वाली होने वाली मौतों से बचाया। और इसी योजना का लाभ पूरा छत्तीसगढ़ ले रहा है।
  • वन क्षेत्र में रहने वाले वनवासी भाइयों के लिए एक दिक्कत थी तेंदूपत्ता संग्रहण और संग्रहण का पारिश्रमिक। मेरा ख्याल है 2003 में 350 का इसकी दर थी. जिसको बढ़ाकर 1500 रुपए प्रति बोरा किया गया है। पारिश्रमिक बोनस मिलाकर 13 वर्षों में 2600 करोड़ का वितरण किया गया है। अन्य वनोपज जैसे इमली, चिरौंजी, गुठली, महुंआ और साल बीज लाख के समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए 71 करोड़ का भुगतान किया गया है। इसी के साथ इनके पैरों में कांटा ना चुभे। सुबह-सुबह हमारी बहनें तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए जाती हैं, इनके लिए और भाईयों के लिए भी 13 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को निःशुल्क चरण पादुका वितरण 140 करोड़ तथा महिलाओं के साड़ी वितरण 34 करोड़ की योजना।
  • बेटियों को स्कूल जाने में दिक्कत होती थी। वे स्कूल छोड़ देती थी. बहुत बड़ी संख्या में ‘‘ड्रापआउट’’ होता था। आज हाईस्कूल स्तर तक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, बीपीएल परिवार की बालिकाओं के लिए निःशुल्क साइकिल योजना देने से जो बेटियां 65 प्रतिशत ही स्कूल जा पाती थी। उसका प्रतिशत बढ़कर 93 प्रतिशत हुआ है। एक योजना का इतना बड़ा असर मैंने देखा और बेटियों को इसमें अपने गांव से अपने घर से दूर स्कूल जाने में सहूलियत हो रही है।
  • उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना, गरीब परिवारों को महाविद्यालयों और छात्रा-छात्राओं को एक प्रतिशत ब्याज दर पर चार लाख रुपए तक ऋण देना। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों को शून्य ब्याज दा पर ऋण देना।
  • एक महत्वपूर्ण योजना जो हमारी कॉलेज जाने वाली बेटियों के लिए बालिकाओं के लिए रही, जिसमें कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज तथा पॉलीटेक्निक कॉलेज। अभी हमने प्राइमरी से लेकर 12 वीं तक को निःशुल्क किया था अब उसको बढ़ाकर निःशुल्क पढ़ाई की व्यवस्था की है।
  • इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक में पढ़ने वाली छात्रा का भी शिक्षण शुल्क माफ किया गया है।
  • मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना इसमें सरकार की ओर से 15 हजार की राशि मिलती है। लगभग 67 हजार कन्याओं की कन्यादान योजनाओं मे इसका लाभ मिला है. और यह योजना ना सिर्फ समाज को जोड़ता है बल्कि सभी समाज की बेटियों का एक साथ कन्यादान योजना से विवाह होता है। हम सब शामिल होते हैं, उन परिवारों की खुशी देखते ही बनती है।
  • बुजुर्गों के कोई योजना नहीं थी, उनकी तीर्थयात्रा के लिए और मुझे लगा कि उनके यदि बच्चे गरीब हैं वे अपने मां- बाप को तीर्थयात्रा नहीं करवा सकते उनकी आस अधूरी ना रह जाए। इसलिए एक बेटे की भूमिका निभाते हुए क्योंकि उन्होंने मुझे अपने बेटे के समान माना है, उनके लिए एक योजना बनाई। दो लाख वरिष्ठजनों को अभी तक निःशुल्क तीर्थयात्रा की योजना का लाभ मिला है और निश्चित रूप से यह योजना उनके जीवन में खुशियां लाता है।
  • कौशल विकास और उच्च शिक्षा हमारे लिए एक चुनौती थी। आज 27 जिलों में कौशल उन्नयन के लिए ‘‘लाइवलीहुड कॉलेज’’ बनाए हैं। सभी विकासखण्डों में इसकी व्यवस्था की जा रही है। और इसमें आज छत्तीसगढ़ में कौशल उन्नयन के बाद जो बच्चे तीन प्रतिशत थे उनकी संख्या 15 प्रतिशत हो गई है। और रोजगार के अच्छे साधन उन्हें उपलब्ध हो रहे हैं।
  • मैं पलटकर देखता हूं तो छत्तीसगढ़ बना तो राष्ट्रीय स्तर के कोई संस्थान नहीं थे। आज हमारे पास आईआईटी, एनआईटी, आईआईएम ट्रिपल आईटी नेशलन लॉ यूनिवर्सिटी, 10 से ज्यादा मेडिकल कॉलेज करीब-करीब 49 इंजीनियरिंग कॉलेज उनकी संख्या बढ़ गई है। यह छत्तीसगढ़ में युवाओं को नए अवसर देने के लिए एक बड़ा कदम हुआ है। कुछ योजनाओं का जिक्र करना चाहता हूं। जो माननीय प्रधानमंत्री जी ने इसकी शुरुआत की इसका क्रियान्वयन हम कर रहे हैं।
  • प्रधानमंत्री उज्जवला योजना में छत्तीसगढ़ में 25 लाख बहनों को 200 रुपए में गैस सिलेंण्डर और चूल्हा दिए जाएंगे।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना में 2022 तक हर गरीब परिवार को घर मिलेगा जिसमें 8 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे।
  • सौर सुजला योजना में 51 हजार गरीब परिवारों को किसानों के लिए 5 हार्स पॉवर और तीन हार्स पॉवर के सिंचाई पंप उपलब्ध होंगे, जो बहुत ही कम कीमत पर 15 हजार, 18 हजार एवं 25 हजार रूपए के ये किसानों के लिए पंप उपलब्ध होगा। जन-जन की बेहतर जिंदगी खुशहाली एवं सुरक्षित भविष्य का सपना साकार हो. और जब आपने मुझे अवसर दिया है तो हम अपनी पूरी टीम के साथ इच्छाशक्ति और विश्वास के साथ  वो काम करने जा रहे हैं। जो आपके जीवन में खुशहाली लाएगी आपको लगेगा कि नए राज्य का निर्माण अटल बिहारी वाजपेयी ने किया है। आपने मुझ जैसे व्यक्ति पर भरोसा किया है, जो एक सामान्य परिवेश से चलकर पार्षद से मुख्यमंत्री तक की यात्रा आपकी वजह से हुआ। मुझे लगता है कि इसके पीछे सिर्फ और सिर्फ आपका आशीर्वाद है। मैं कोशिश करूंगा कि आने वाले समय में इससे और बेहतर जो हम कर सके, करेंगे।

पुरूष उद्घोषक

  • माननीय मुख्यमंत्री जी, इन दिनों प्रदेश और देश में अर्थव्यवस्था, मुद्रा आदि को लेकर जितनी चर्चा हो रही है, उतनी हमने पहले कभी नहीं सुनी। इस संबंध में आप क्या कहेंगे?

मुख्यमंत्री जी

  • यह हमारा सौभाग्य है कि भारत को माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा दृढ़संकल्पी और दूरदर्शी प्रधानमंत्री मिला। उन्होंने देश के सामने दो टूक राय रखी कि काला धन से मुक्ति के बिना देश की बड़ी- बड़ी समस्याओं से मुक्ति मिलना संभव नहीं है। भ्रष्टाचार, आतंकवाद और महंगाई जैसी बड़ी समस्याओं की जड़ कालाधन है। इसलिए माननीय प्रधानमंत्री जी ने कालाधन के खिलाफ सीधी जंग छेड़ दी है।

महिला उद्घोषक

  • डॉक्टर साहब, अब ‘कैशलेस ट्रांजेक्शन’, ‘प्लास्टिक मनी’, ‘इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर’ आदि शब्दों का बहुत उपयोग हो रहा है। इसका आशय भी साधारण भाषा में समझाने की जरूरत महसूस करते हैं क्या आप?

मुख्यमंत्री जी

  • बड़े पैमाने पर नगद लेनदेन के हिसाब-किताब छुपाने या नगद राशि की सुरक्षा उसके सदुपयोग या दुरुपयोग को लेकर अनेक समस्याएं आती हैं। उसका अनुभव सिर्फ भारत को ही नहीं, बल्कि पूरी दुिनया को होता है। माननीय प्रधानमंत्री जी प्रत्येक भारतीय नागरिक को यह सुविधा देना चाहते हैं, जो विकसित देश के नागरिकों को उपलब्ध है। इसलिए उन्होंने कैशलेस ट्रांजेक्शन या नकद रहित लेन-देन को भारत में भी बढ़ावा देने का मन बनाया है। इस व्यवस्था में ज्यादातर प्लास्टिक से बना हुआ कार्ड उपयोग में आता है। इस तरह प्लास्टिक-मनी का शब्द लोकप्रिय हुआ।
  • ‘प्लास्टिक-मनी’ का मतलब प्लास्टिक से बना हुआ नोट नहीं है, बल्कि ऐसी प्रणाली है, जिसमें विभिन्न तरीकों के ‘स्मार्ट कार्ड’ के जरिए बैंक या अन्य स्थानों पर नगद राशि के बदले आर्थिक लेन-देन हो। ‘स्मार्ट कार्ड’ का उल्लेख मैंने इसलिए किया, क्योंकि हमने ‘प्रधानमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना’ और ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना’ आदि में नगद राशि का लेन-देन नहीं करके, एक ‘स्मार्ट कार्ड’ जारी किया है, जिसे लेकर जब कोई व्यक्ति अधिकृत अस्पताल में जाता है तो रूपए की तरह उस कार्ड का उपयोग वहां पर करता है। अर्थात् वह बिना नगद लिए अस्पताल जाकर अपना इलाज करा आता है, जिसमें प्लास्टिक का बना हुआ ‘स्मार्ट कार्ड’ की भी जो प्रणाली है, वह नगदी लेन-देन का माध्यम बन जाती है। इसलिए इस व्यवस्था को ‘प्लास्टिक-मनी’ कहा जाता है।
  • इसी तरह से ‘ई-बैंकिंग’ या ‘इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर’ होता है जब आप बैंक में ‘एटीएम कार्ड’ या ‘इंटरनेट’ के माध्यम से नगद रकम को हाथ लगाए बिना भी अपने बैंक एकाउंट में जमा रकम का लेन-देन न सिर्फ अपने गांव-शहर में बल्कि, दूसरे गांव या शहर में भी कर सकते हैं।

पुरूष उद्घोषक

  • डॉक्टर साहब, विमुद्रीकरण के दौर में आजकल मोबाइल ‘बटुआ’ या ई-वॉलेट ऐसे अनेक तरह के शब्द बोलचाल में आ रहे हैं, जिसको लेकर जनता जिज्ञासु है। और इन चीजों के बारे में जानना चाहती है ताकि सुविधा मिलने पर उसका उपयोग कर सके। क्या छत्तीसगढ़ में भी ‘ई-बटुआ’ का उपयोग बढ़ेगा?

मुख्यमंत्री जी

  • आर्थिक व्यवहार में प्रमुख रूप से पांच शब्द आजकल, बहुत चल रहे हैं।
  • ये पांच शब्द, पांच तरीकों के बारे में बताते हैं जिससे हम नगद रूपए लेन-देन के बिना भी आर्थिक लेन-देन कर सकते हैं।
  • पहला शब्द है- यू.पी.आई.। लगभग सभी बैंकों का अपना ‘यू.पी.आई. एप’ होता है। जिस बैंक में आपका खाता है उसका ‘यूपीआई-एप’ डाउनलोड करके खाताधारी अपने मोबाइल का उपयोग करते हुए किसी वस्तु की खरीदी या सेवा का उपयोग करने पर उसका भुगतान कर सकता है। इसके लिए आपके पास ‘स्मार्ट फोन’ होना चाहिए।
  • दूसरा शब्द है- यू.एस.एस.डी.। यह साधारण फीचर वाले मोबाइल फोन से भी संभव है। अपने फोन में स्टार 99 हैश डायल करके, उसमें आए निर्देशों का पालन करते हुए अपने बैंक खाते से किसी भी दुकान में छोटी से छोटी राशि का भुगतान किया जा सकता है। उदाहरण के लिए- रायपुर में चाय दुकान चलाने वाले अजय यादव, सूरजपुर में ऐसा ही छोटा कारोबार करने वाले कैलाश देवांगन ने अपनी दुकान के लिए यह सुविधा ले ली है, जहां वे 5 से 10 रू. का भुगतान भी मोबाइल फोन के माध्यम से प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे युवाओं की सजगता को मैं सलाम करता हूं, जो समय के साथ चलना जानते हैं और उनके छोटे-छोटे कदम देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का आधार बनते हैं।
  • तीसरा शब्द है- प्री-पेड वॉलेट, जिसे ‘ई-बटुआ’ कहते हैं। उदाहरण के लिए- स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया का ‘मोबाइल एप बडी’, काफी लोकप्रिय है। आपके बैंक एकाउंट से एक निश्चित राशि ट्रांसफर होकर आपके मोबाइल के खाते में जमा हो जाएगी। आप बिना किसी स्वाइप मशीन के सिर्फ अपने मोबाइल का उपयोग करके इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।
  • चौथा शब्द है- कार्डस् पी.ओ.एस. अर्थात् पॉइन्ट ऑफ सेलडिवाइस। इसके लिए अलग से कोई कार्ड लेने की जरूरत नहीं है, बल्कि आपको अपने बैंक से मिला एटीएम कार्ड, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड ही उपयोग में आता है।
  • और पांचवां शब्द है- आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम। इसके लिए आपके बैंक खाते में आधार कार्ड की सीडिंग होना जरूरी है। यह सबसे सुरक्षित उपाय है, क्योंकि इसमें आपके अंगूठे के निशान व आधार नम्बर से ही भुगतान हो सकता है।
  • छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रत्येक पंचायत में स्थापित किए जा रहे उपभोक्ता सेवा केन्द्र में यह सुविधा दी जाएगी। बलरामपुर जिले में बड़ी पहल हुई है, जहां सी.एस.सी. बैंक की सेवाएं देने को तैयार हैं। इसलिए मैं आप लोगों से आव्हान करता हूं कि जिन खाताधारकों ने अपने बैंक एकाउंट में ‘‘आधार सीडिंग’’ नहीं कराई है, वे लोग बैंक में जाकर एक बार आधार नम्बर नोट कर ले, तो उन्हें यह सुविधा अपने घर के पास और बहुत आसानी से मिलने लगेगी। सी.एस.सी. के बेहतर ढंग से काम करने पर आपको न तो बैंक जाने की जरूरत पड़ेगी न एटीएम।

महिला उद्घोषक

  • मुख्यमंत्री जी, आजकल ‘कैशलेस सोसायटी’ के बारे में भी बहुत चर्चा है। प्रधानमंत्री जी ने भी आव्हान किया है कि ‘कैशलेस सोसायटी’ बनाना चाहिए। इस दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भी क्या कोई विशेष प्रयास किए गए हैं?

मुख्यमंत्री जी

  • मैंने अभी जिन उपायों का जिक्र किया है, वे सभी उपाय ‘कैशलेस सोसायटी’ बनाने की ओर ही ले जाते हैं।
  • जब व्यक्तिगत रूप से हम नगद राशि से लेन-देन नहीं करेंगे और सभी लोग जब कार्डस् या इंटरनेट के माध्यम से लेन-देन करने लगेंगे, तब करेंसी नोटों को अपने जेब में लेकर घूमने की समस्या ही समाप्त हो जाएगी और इस तरह ‘नगद-विहीन समाज’ अर्थात् ‘कैशलेस सोसायटी’ का निर्माण होगा। साथ ही नगदी का दुरूपयोग भी रूकेगा।
  • छत्तीसगढ़ में हम उस स्तर पर प्रशिक्षण देने जा रहे हैं, जैसा कि आम चुनाव के संचालन के लिए दिया जाता है, जिसमें अधिकारी-कर्मचारी से लेकर मतदाता तक को यह जानकारी मिल जाती है कि उसे किस तरह से वोट डालना है और किस तरह की सुरक्षा अपनाना है।
  • हमने सभी बैंकों से कहा है कि वे अपने खाताधारकों को प्रशिक्षित करें कि वे किस तरह से एटीएम, इंटरनेट से भुगतान या इससे जुड़ी विभिन्न सुविधाओं का उपयोग करें।
  • राज्य शासन अपने स्तर पर भी सभी पंचायतों में सी.एस.सी. या उपभोक्ता सेवा केन्द्र को सक्षम बना रहा है और इसके लिए प्रशिक्षित किए गए लोगों के माध्यम से गांव-गांव में प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है।

पुरूष उद्घोषक

  • माननीय मुख्यमंत्री जी, ‘कैशलेस याने नगद विहीन लेन-देन’ के लिए भी तो बहुत सारी सावधानियों की आवश्यकता पड़ेगी। नया-नया काम करने में लोगों से कुछ गलतियां भी हो सकती हैं, जिसका लाभ स्वार्थी तत्व उठा सकते हैं। ऐसी स्थिति में ऐसी क्या सावधानियां अपनानी चाहिए, जिससे कि गलतियां ही न हों।

मुख्यमंत्री जी

  • निश्चित तौर पर ‘कैशलेस ट्रांजेक्शन’ या ‘नगद-विहीन लेन-देन’ में जितनी सुविधा है, उसी पैमाने पर सतर्कता और सावधानी बरतने की जरूरत भी है और इसके लिए गांव हो या शहर, किसान हो या कारोबारी, महिला हो या पुरूष, बच्चे हो या जवान, हर स्तर पर लोगों को समझाना जरूरी है, ताकि वे सतर्कता के साथ नई सुविधाओं का उपयोग करें और किसी भी तरह की ठगी का शिकार नहीं होने पाएं।
  • रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी बैंक अपने खाताधारक से फोन पर कोई जानकारी नहीं लेगा। इसलिए बैंक का नाम लेकर फोन करने वाले को कड़ाई से मना करने में कोई संकोच न करें। और ज्यादा अच्छा हो कि उससे बात ही न करें,  क्योंकि बातचीत में फंसाकर वे ऐसी जानकारियां निकलवा लेते हैं, जिससे कि आपको नुकसान हो सकता है।
  • ऐसे उपायों के बारे में व्यापक तौर पर प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी की जा रही है।

महिला उद्घोषक

  • इस समय प्रदेश में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का बड़ा अभियान चल रहा है। ‘नोटबंदी’ के कारण क्या इसमें कोई समस्या आई है? और सरकार ने इसके लिए क्या इंतजाम किए हैं?

मुख्यमंत्री जी

  • निश्चित तौर पर समर्थन मूल्य में धान खरीदी से किसानों भाई-बहनों का सालभर का बजट बनता है। हमने हमेशा की तरह इस बार भी धान खरीदी की शानदार व्यवस्था की है।
  • 1333 सहकारी समितियों के 1889 उपार्जन केन्द्रों में धान की आवक तेजी से हो रही है। उपार्जन केन्द्रों में धान बेचने वाले किसानों को उनकी उपज का ऑनलाइन भुगतान करने की व्यवस्था है। जिला सहकारी बैंकों को अभी तक लगभग 6 सौ करोड़ नगद राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है और आगे भी इसमें कोई समस्या नहीं आएगी।

महिला उद्घोषक

  • श्रोताओं! आपकी प्रतिक्रियाएं हमें आपके पत्र, सोशल मीडिया-फेसबुक, ट्विटर के साथ SMS से भी बड़ी संख्या में मिल रही हैं। इसके लिए आप सबको बहुत-बहुत धन्यवाद।
  • आगे भी आप अपने मोबाइल के मेसेज बॉक्स में RKG के बाद स्पेस लेकर अपने विचार लिखकर 7668-500-500 नम्बर पर भेजते रहिए और संदेश के अंत में अपना नाम और पता लिखना ना भूलें।
  • मुख्यमंत्री जी, इस बार हमारे पास श्रोताओं की ज्यादातर प्रतिक्रिया ‘नोटबंदी’ को लेकर है। वैसे तो आपने विस्तार से इस बारे में कह दिया है, लेकिन आप उनके पत्रों व एसएमएस के जवाब में क्या कहना चाहेंगे?

मुख्यमंत्री जी

  • इतनी बड़ी संख्या में एसएमएस और पत्र द्वारा अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए मैं सबसे पहले आपको धन्यवाद दूंगा और मुझे बहुत खुशी है कि प्रदेश के कोने-कोने से श्रोंताओं ने नोटबंदी की तारीफ की है। इस निर्णय को अमल में लाने के लिए वे अपने स्तर पर सहयोग करना चाहते हैं। यह जज्बा ही हमें समाज, प्रदेश और देश के लिए साहसिक और बड़े निर्णय लेने में मदद करता है। मैं धन्यवाद देना चाहूंगा राजनांदगांव के अरुण शुक्ला और अर्पणा, धमतरी के शुभम बघेल पकरिया से कोमल सिंह, राहुल सेन, दुष्यंत साहू, नीलकांत खट्टर आदि हमारे हजारों साथियों को, जिन्होंने एस.एम.एस. के माध्यम से पत्र के माध्यम से अपने विचार रखे उन सभी को मैं एक बार फिर से धन्यवाद देना चाहूंगा कि आप निश्चित रूप से अपना सुझाव और सलाह देते रहे। सरकार की नीतियों के क्रियान्वयन में आपके ऐसे सुझाव हम सब के लिए मागदर्शक होंगे।

पुरूष उद्घोषक

  • श्रोताओं, अब बारी है ‘क्विज’ की।

सातवें ‘क्विज’ का प्रश्न था-
    ‘सौर सुजला योजना’ के अंतर्गत दिए जाने वाले पम्प कैसे चलेंगे?
    जिसका सही जवाब है - A. सौर ऊर्जा

  • सबसे जल्दी जिन पांच श्रोताओं ने सही जवाब भेजे हैं, उनके नाम हैं-

    1. शेखर कुमार, ग्राम अतरगढ़ी, जिला बेमेतरा
    2. अनिमा भगत, मानपुर, जिला सरगुजा
    3. डिकेश्वर साहू, मरटरा, जिला बेमेतरा
    4.  वीणा वंडलकर, रायपुर
    5.  गजेन्द्र वर्मा, जामडीह, जिला बलौदाबाजार
महिला उद्घोषक

  • और श्रोताओं अब समय है आठवें क्विज़ का।

    जिसका सवाल है-

  • छत्तीसगढ़ में पंचायत स्तर पर ‘सी.एस.सी.’ किस संस्था के समान सेवा कर सकेंगे?
  • इसका सही जवाब A. पेट्रोल पम्प  या B. बैंक में से कोई एक है।
  • अपना जवाब देने के लिए, अपने मोबाइल के मैसेज बॉक्स में QA लिखें और स्पेस देकर A  या B जो भी आपको सही लगे, वह एक अक्षर लिखकर 7668-500-500 नम्बर पर भेज दें। साथ में अपना नाम और पता अवश्य लिखें।
  • आप सब ‘रमन के गोठ’ सुनते रहिए और अपनी प्रतिक्रियाओं से हमें अवगत कराते रहिए। इसी के साथ आज का अंक हम यहीं समाप्त करते हैं। अगले अंक में 8 जनवरी को होगी आपसे फिर मुलाकात। तब-तक के लिए दीजिए हमें इजाजत। नमस्कार।
     
Date: 
11 December 2016 - 5pm